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तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई शुरू

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सुप्रीम कोर्ट में आज "तीन तलाक", "निकाह हलाला" की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हो गई है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि बहुविवाह पर समीक्षा नहीं की जाएगी। वहीं कोर्ट ने कहा, 'हम ये समीक्षा करेंगे कि तीन तलाक धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं। अगर तीन तलाक धर्म से जुड़ा मामला पाया गया तो कोर्ट इस मामले में दखल नहीं देगी। लेकिन अगर तीन तलाक धर्म से जुड़ा मामला नहीं मिला तो आगे सुनवाई चलती रहेगी और कोर्ट यह देखेगा कि तीन तलाक से मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है या नहीं। चीफ जस्टिस ने कहा कि पहले तीन तलाक के मामले को देखा जायेगा। सुनवाई में पहले तीन दिन तीन तलाक को चुनौती देने वालों को मिलेंगे। इसमें उनको यह बताना होगा कि धर्म की स्वतंत्रता के तहत तीन तलाक नहीं आता। इसके बाद अगले तीन दिन डिफेंस वालों को मौका मिलेगा जिसमे उनको यह बताना होगा कि तीन तलाक धर्म का हिस्सा है। 

ये है पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ
चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ तीन तलाक की याचिकाओं पर सुनवाई  करेगी। इस पांच सदस्यीय पीठ में सभी धर्मो के जज शामिल है। पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर शामिल हैं। संवैधानिक पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि बहुविवाह पर समीक्षा नहीं की जाएगी। 


ये है मामला 
उत्तराखंड की शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता को चुनौती दी थी। शायरा ने अपनी याचिका में मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत महिलाओं के साथ लैंगिक भेदभाव के मुद्दे, एकतरफा तलाक और संविधान में गारंटी के बावजूद पहले विवाह के रहते हुए मुस्लिम पति द्वारा दूसरा विवाह करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से विचार करने को कहा है। 
एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने तीन तलाक पर 
संज्ञान लिया था और चीफ जस्टिस से आग्रह किया था कि वह तीन तलाक के मुद्दे पर स्पेशल बेंच का गठन करें ताकि मुस्लिम महिलाओ के साथ भेदभाव के मामले को देखा जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल और नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी को जवाब दाखिल करने को कहा था और पूछा था कि क्या जो मुस्लिम महिलाएं भेदभाव की शिकार हो रही हैं। 

केंद्र सरकार का रुख 
केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा है कि तीन तलाक के प्रावधान को संविधान के तहत दिए गए समानता के अधिकार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। केंद्र ने कहा कि भारत जैसे सेक्युलर देश में महिलाओ को जो संविधान के तहत जो अधिकार मिले है  उससे उनको वंचित नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार तीन तलाक को महिला अधिकारों के विरुद्ध मानती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम धार्मिक नेताओं से अपील की थी कि तीन तलाक के मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा न बनने दें। 

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का रुख 
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि ट्रिपल तलाक के खिलाफ दाखिल याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। बोर्ड ने कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ को संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत प्रोटेक्शन है उसे मूल अधिकार के कसौटी पर नहीं आंका जाना चाहिए। तीन तलाक इस्लाम का अंदरूनी मामला है। 

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